DLS Method In Cricket – यह नियम क्या है और कैसे लागू होता है ?

नमस्कार दोस्तों कैसे हैं आप लोग दोस्तों आज हम आपको बताने वाले हैं DLS Method क्या है ? DLS Method का पूरा नाम डकवर्थ लुईस मेथड है और DLS Method का प्रयोग क्रिकेट मैच में किया जाता है इस बात पर लोगों का ज्यादा ध्यान इसलिए आज चला गया है क्योंकि कल के मैच में जो आई पी एल 2023 का फाइनल मैच था जो कि गुजरात टाइटंस और चेन्नई सुपर किंग के बीच में खेला जा रहा था।

दोस्तों इस मैच में गुजरात टाइटंस की टीम ने निर्धारित 20 ओवर में पहले बैटिंग करते हुए 214 रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया था जिसमें उनके सभी बल्लेबाजों ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया था कुल लेकर चेन्नई सुपर किंग्स की टीम ने 4 विकेट गिराए थे साथ ही साथ सभी बल्लेबाज ने मिलकर 214 रन बना दीजिए जिसमें साईं सुदर्शन के 96 रनों की पारी सर्वाधिक थी।

लेकिन जब चेन्नई की पारी शुरू हुई तो शुरू के 3 रन ही हुए थे उसके बाद बारिश शुरू हो गई और चेन्नई सुपर किंग्स का स्कोर 4 रन बिना किसी विकेट के था उसके बाद खेल बहुत देर बाद शुरू हुआ और लगभग 3 घंटे के इंतजार के बाद दोबारा गेम शुरू किया गया लेकिन इसमें पूरे मैच के ओवर कम कर दिए गए और चेन्नई सुपर किंग्स को 15 ओवर में 171 रन का टारगेट दिया गया और यह टारगेट DLS Method के आधार पर था। उसके बाद से लोग लगातार यह विचार कर रहे है की आखिर यह DLS Method in cricket कैसे लागू होता है ?

DLS का फुल फॉर्म क्या है ?

दोस्तों DLS Method का फुल फॉर्म डकवर्थ लुईस स्टर्न मेथड है और यह क्रिकेट मैच में प्रयोग किया जाता है इसका प्रयोग कैसे किया जाता है जब क्रिकेट मैच में किसी प्रकार की बाधा आती है और अधिकांश बाधा बारिश के कारण होती है। तो इस नियम के अनुसार सामने वाली टीम को या दोनों टीम को ओवर कम खेलना पड़ता है यह मैच की परिस्थिति पर डिपेंड करती है लेकिन इसमें ज्यादातर फायदा बाद में बैटिंग करने वाले टीम को मिलता है।

डकवर्थ लुईस स्टार मेथड का सबसे महत्वपूर्ण काम यह है कि अगर कोई मैच इंपॉर्टेंट मैच है या कोई भी मैच है अगर उसका रिजल्ट को किसी भी तरह से घोषित करना है। तो ओवर को कम करके मैं इस को जल्द से जल्द खत्म करा कर अंतिम निर्णय तक मैच को पहुंचाना होता है।

DLS FULL FORM

D-Duckworth
L-Lewis
S-Stern

DLS Method का शुरुवात कैसे हुआ ?

दोस्तों डकवर्थ लुईस मेथड की शुरुआत 1997 में हो रहे जिंबाब्वे और इंग्लैंड के बीच का मैच से हुई जब इन दोनों टीम के बीच मैच हो रहा था। और बीच में बारिश आने से मैच को रद्द कर दिया गया मैच रद्द होने से दोनों टीम को एक एक पॉइंट मिला लेकिन डकवर्थ लुईस मेथड के निर्माता फ्रैंक डकवर्थ और टोनी लुईस ने यह महसूस किया कि इस मैच के परिणाम को घोषित किया जाने वाला विधि सही नहीं था। इसमें सुधार किया जा सकता है जिसके लिए उन्होंने इस मेथड का खोज किया।

उन्होंने इस नियम का खोज बारिश से प्रभावित या अन्य किसी कारणों से प्रभावित मैच को बेहतर ढंग से उसके रिजल्ट को लाने के लिए इस मेथड का अविष्कार किया। और इसका पहली बार प्रयोग 1998 में हो रहे जिंबाब्वे और इंग्लैंड के बीच एकदिवसीय मैच में किया गया था

DLS Method कैसे काम करता है ?

डीएलएस मेथड में एक जटिल गणितीय सूत्र का प्रयोग किया जाता है इस सूत्र में या ध्यान रखा जाता है कि पहली पारी में कितने ओवर का खेल हुए हैं कितने विकेट गिरे हैं साथ ही बल्लेबाजी करने वाली टीम का किस प्रकार का रन रेट था इन सभी कारणों को मिला करके इस नियम का प्रयोग करके नई टीम को लक्ष्य दिया जाता है।

इसमें देखा जाता है की पहली पारी में बल्लेबाजी करने वाली टीम ने कितने विकेट कितने रन पर खो दिए थे। और अंतिम होते-होते उन्होंने कुल कितने विकेट खोकर कितने रन बनाए। और उनका राम रेट क्या रहा था उनकी स्थिति क्या थी इसी बात को ध्यान में रख कर के जब ओवर कम किया जाता है तो रन भी उसी हिसाब से दिया जाता है।

अगर साफ-साफ कहें तो डीएलएस मेथड इस प्रकार का मैथड है कि पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम का रन रेट विकेट की संख्या, विकेट कब-कब गिरे और भी कितने रन बना सकते थे। अगर पहले विकेट नहीं गिरे होते तो मुझे भी को मिला करके एक सटीक टारगेट सामने वाली टीम को दिया जाता है इसको अच्छी तरह से समझ पाना सभी के लिए मुश्किल है लेकिन आसान शब्दों में से कृपा से समझ सकते हैं कि टीम के रन रेट के आधार पर ही इस उसको को दिया जाता है।

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